यह श्रिष्टि माहान।
इस खला [स्पेस] में जो भी है ,
यह सभ सॉलिड ,लिक्विड,गैस और शक्ति का ही रूप है।
में चला करने अपने ही जीवन की तलाश।,
मैने पाया,सिर्फ भोजन ,पानी,हवा,रौशनी और आकाश।
यह धरम जिसको बोलते रहे हैं गॉड,अल्लाह,वाहिगुरु और भगवान् ,
वह निकले धरती,सूर्य,पानी,हवा और अंतरिक्ष की शक्ति से बना मेरा ही जीवन और मेरी ही जान।
इन पादरियों,मुल्लों,गियानियों [भाई जी] और पुजारियोंऔर इन की किताबों और इनके लीडरों और पॉलिटीशंज ने जितना है मेरे मन[साईंकोलोजी] को, लूटा और भरमाया,
में ही इन लोगों और किताबों को मेरा हितैषी समझ कर बेवकूफ बनता रहा ,सिर्फ विज्ञान [साइंस और इसके आविष्कार ] ही सिर्फ मेरे असली जीवन में काम आया।
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