मन की बात और मनमानी।
बहुत सुनली मन की बात और बहुत करली मनमानी,
बहुत महंगे कपडे पहन लिए,बहुत खुश कर लिए अम्बानी और अडानी।
बहुत विदेशो की सैर करली,और बहुत उडा लिया धन, भारत के खज़ाने का,
बहुत अकनॉमी का सत्यानाश कर लिया,बहुत सरकारी अदारे प्राइवेट कर दिए,
बहुत बे रोजगारी पैदा करदी,बहुत गरीबी फैलादी,बहुत मजदूर और किसान मार दिए।
अब तो तेरे पाप का घड़ा भर गया होगा,अब तो तेरा मन इतना खून पी कर भर गया होगा,
ओ इस कल युग के दरिंदे हुक्मरान अब तो अपना त्याग पतर देदे ,अब तो तू अध् मरा हो गया होगा।
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