ई वी एम।
जब २० लाख ई वी एम् हों पास,
तो जनता की वोट का फ़िक्र ही किया ?
जब इलेक्शन की जीत की चाबी हो हाथ में,
तो फिर डेमोक्रेसी से लड़ कर जीतने का फ़िक्र ही किया ?
जब झुकने का कोई कारन ही ना हो और हंकार हो आस्मां पर,
तो इन किसानों और मजदूरों के आंदोलनों का डर ही किया ?
हम तो बादशाह हैं जोरो जुलम के,हमें इंसानियत से मतलब ही किया,
डेमोक्रेसी और संविधान मानने वाले कोई और होंगे, हम तो आरएसएस और बीजेपी हैं, हमें इनसे वास्ता ही किया ?
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