यह सत्ता,धन और दौलत का भूखा पॉलिटिशियन और कैपिटलिस्ट।
इस सत्ता ,धन और दौलत के भूखे पॉलिटीशंज और कैपिटलिस्ट को रोटी की भूख नहीं लगती बल्कि इनको काजू की रोटी और महंगी खुम्बों की सब्जी की भूख लगती है,जिस की वजह से इन में तमो गुना कूट कूट कर भरा हुआ है। इनके दिल में इंसानियत के लिए रेहम का सतो गुना कहाँ से आएगा ? अंदर गंदगी इतनी जमा हो गई है, कि सभ झूठ ही झूठ है,हंकार ही हंकार है,इंसानियत तो इनके नजदीक भी नहीं फटकती है ।
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