जीवन जीने की जरूरतें।
हमें चाहिए जीवन जीने की जरूरतें,
ना कि मन की बातों से, टाइम बर्बाद करने की हरकतें।
तुम तो गुलाम हो, अम्बानी और अडानी जैसे पूंजीपतियों के ,
हम आज़ाद भारत के आज़ाद शहरी हैं,नहीं वास्ता कोई इन धन और दौलत के भूखे टटपुँजियों से।
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