मौजूदा आम जनता और कॅपिटलिस्ट्स और सरमाएदारों के बीच की लड़ाई।
भारत हमेशा ही किसी ना किसी संघर्ष से झूझता रहा है। सभ से पहले मनुवाद ब्राह्मणवाद से,फिर मुगलों से,इसके बाद अंग्रेजों से और अब भारतीय काले अंग्रेजों से । यह लड़ाई बहुत खतरनाक है,कियुँकि यह लड़ाई भारत के ही दो वर्गों, एक जिन के पास सभ कुछ है और दुसरे जिन के पास से सभ छीना जा रहा है या कुछ भी नहीं है। आज यह अम्बानी और अडानी जैसे कॅपिटलिस्ट्स और धनाढ भारत के सभ से अमीर तो दिन दूनी और रात चौगनी या कई गुना जियादा तरकी करते जा रहे हैं जब कि देश की इकॉनमी की जी डी पी माइनस २४% पर है,और बे रोजगारी और महंगाई आस्मां छूह रही है। यह अम्बानी और अडानी जैसे सरमाएदार, हिंदुत्व राष्ट्र के बहाने,मोहन भगवत और मोदी जैसे लालची किसम के हैवानों के जरिये, भारत की डेमोक्रेसी और कंस्टीटूशन को नष्ट करके, देश को अंग्रेजों की तरह गुलाम बना कर, हड़पना चाहते हैं और इस पर काबिज होना चाहते हैं।
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