जीवन और मरितू का विज्ञान।
हमारा जीवन और मरितू हमारे भोजन,पानी और हमारी प्राण वायु पर निर्भर करता है। और हमारी मरितू हमारी अप्राण वायु पर निर्भर करती है। जो स्वास हम अपने नाक द्वार से अंदर लेते हैं यह ऑक्सीजन होती है और यह ही हवा हमारे फेफड़ों से जब सेलों से आई कार्बन से मिल कर ,ऑक्सीडाइज हो क़र कार्बन डाइऑक्साइड बन जाती है और दूषित या जहरीली बन जाती है तो मरितू का कारण बनती है। इस कार्बन डाइऑक्साइड गैस को हमें हमेशा बोल कर,उबासी से,नीछ से या नाक दवारा ही बहार निकालते और फेंकते रहना चाहिए। जीवन देने वाली प्राण वायु हमारे सर से या आकाश से पाऊं की तरफ को चलती है और अप्राण वायु हमेशा हमारे पाऊं से ले कर सर की तरफ या आकाश की तरफ को चलती है। इस अप्राण वायु [कार्बन डाइऑक्साइड ] को निकालने के लिए ही हम प्राणायाम,सिमरीन,जाप और मंतरों जैसी विधियों का उपयोग करते हैं। पेट्रोल या डीजल इंजन में तुम ने देखा होगा,इंजिन द्वारा हमेशा कारबुरेटर से स्वांस लिया जाता है और एग्जॉस्ट से हमेशा धुंआ निकलता रहता है। अगर एग्जॉस्ट किसी वजह से बंद हो जाए तो इंजिन रुक जाता है। यही हिसाब हमारे जीवन के साथ है। हमारे दिल और फेफड़े भी इंजिन की तरह ही काम करते हैं। दिल और फेफड़ों के फेल हो जाने का नाम ही हार्ट फेलियर है। इस लिए हमें प्राणायाम,सिमरीन,जाप गीत वगैरा के आंतरिक शुद्धि साधनों का उपयोग करते रहना चाहिए।
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