मोदी जी की साइकोलोजी।
जो न अपने कर्मों से कभी बन सका इतना हसीन,
वह कभी सोने की तारों से अपने नाम का बना हुआ,दस लाख का, सूट पहनता है ,
कभी महंगे महंगे आर्टिस्टों से अपने बालों को और दाढ़ी को बनवाता है।
जिसने कभी साइंस का कोई लेसन न पढ़ा हो,
वह शक़श इधर उधर के रद्दी के टोटकों से अपना दिल बहलाता है।
जिसका कोई महान, पढ़ा लिखा पुरष, दोस्त न बना हो,
वह ओबामा जैसे भले, ईमानदार, माहान पुरषों को अपना दोस्त बताता है।
जिसने कभी जिंदगी में इंसानियत की कदर न की हो,जिसने हज़ारों इंसानों का खून किया हो ,
वह ईटों और पथरों के मंदिरों की ख़ाक छान कर,रुद्राक्षों की मालाएं पहन कर धर्मात्मा कहलवाने का नाटक करता है
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