आधियात्मिक धनुष बाण।
सूर्य शक्ति का धनुष बना कर,
सागरों के पानी का बाण बना कर ,
जब में बाण छोड़ता हूँ तो बादल बनते हैं ,
गर्जना होती है,बिजली कड़कती है, और बादल ठन्डे हो कर, बारिश बरसती है।
धरती माता की पियास बुझती है,
हरयाली और वनस्पति के भोजन की उत्पति होती है।
सभी जीव जंतु इस भोजन को कहते हैं,
अपने जीवन का निर्भाव करते हैं,और खुशीयाँ मनाते हैं।
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