गर्मी और सर्दी या ठण्ड।
गर्मी प्रकृति के हर कण को गरम करके उसको हल्का या लाइट कर देती है जिस से वह ऊपर की तरफ को उड़ने लगता है ,जिस परिकिरिया को दरव के लिए वाष्पीकरण कहते हैं ,पर जब इन गरम अवस्था के कानों को ठन्डे रीजन से गुज़ाना होता है तो यह ठन्डे हो कर फिर धरती की और ग्रॅविटेट होने लगते हैं जैसे बारिश के कणोंके साथ होता है इस विवस्था को प्रेसिपीटशन कहते हैं।
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