घोर कलयुग के बाद सतयुग कियूं आता है ?
घोर कलयुग की वह विवस्था है जिस में राज करने वालों का कोई दीन ईमान नहीं रहता,कोई आर्डर नहीं रहता ,हर तरफ अँधेरा ही अँधेरा नज़र आता है,हर विवस्था बुरी तरह चरमरा जाती है जैसा कि आज कल आरएसएस/बीजेपी/मोदी राज में हो रहा है,राज करने वालों की सुध बुध ही नष्ट हो जाती है। उन से ऐसे करम होते हैं जो आम जनता के हित में ना हो कर उनके विरुद्ध होते हैं और उनको मारने वाले होते हैं। इस से आम जनता उत्तेजित हो कर इंक़लाब लाती है और विवस्था परिवर्तन लाती है जो जात पात और धरम रहित, सत युग की शुरुआत होती है और घोर कलयुग या मनुवादी और ब्राह्मणवादी अधरम का नाश हो कर मॉडर्न साइंटिफिक सोशलिज्म और जीवन की खुशियां लाती है।
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