भगवान् किया है ?
भगवान् कोई पाठ करने की या पूजा करने की,या प्रार्थना करने की चीज नहीं है,
यह तो ब्राह्मणों/गियानियों के दिए हुए षड यंत्र हैं , ये तो सिर्फ परम आनंद को महसूस करने की कला है।
यह प्रसाद गियानियों और प्रचारकों को बिलकुल नहीं मिलता,
यह प्रसाद तो पागल और मस्त प्रेमियों को ही मिलता है,कियुँकि यह तो शुद्ध पेम की शक्ति है।
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