खुदा।
खुद में खुदा है बाहरम मैं खोना,मिटना और वेहम है ,
खुद में ढूंढोगे तो पाओगे,नहीं तो यह सभ हमारे ही मन की उलझन है।
मन का इधर उधर तलाश करते रहना ही,भटकना है और दुःख है,
मन का अपने केंदर पर स्थित हो जाना ही सुख, आनंद और सवरग है।
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