वोटर।
ना में धरम को जानूं,ना में जात को जानूं,
में जानूं अपने जीवन को,जिसका जीना मुश्किल हो गया है ।
मंगाई ने कमर तोड़ राखी है,सरकार गूंगी और बेहरी हो गई है,
किसको जाके फ़रियाद करून,धंदे सभ चौपट हो गए हैं।
जुल्मों की भरमार छाई हुई है ,कहीं कोई सुनवाई नहीं है ,
धनवानों के लिए तो सवरग है यह ,पर गरीबों की मौत आई हुई है।
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