शुद्ध और पवित्तर रूहों [आत्माओं ]से प्रेम।
यह शरीर की अड़चनों ,बेईमानियां,बीमारियों,नखरे, शैतानियां और षड यंत्रों को देकते हुए हम ने तो शुद्ध और पवित्तर रूहों और आत्माओं से प्रेम करना सीख लिया है।
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