माथा टेकन।
मंदिरों,मस्जिदों,गुर्दवारे और चर्चों की बजाए जो लोग अपने घर में ही अपने माता,पिता या बड़ों या सिर्फ धरती माता को माथा टेकते हैं वह हज़ार गुना अच्छे हैं। कियुँकि वह किसी ढोंग में लिपत नहीं हैं।
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