धरती का भोजन,पानी और हवा।
धरती का जो भोजन है , पानी है,यही धरती की और हम सभ की जिंदगानी है और जवानी है,
यह सूख जाए तो हर तरफ काल है, वैरानी है ,बस यही जिंदगी की अनसुलझी सच्ची कहानी है।
यह पानी ही हमारे भाव यानि बादल हैं ,जो सुख और आनंद की तलाश में मन बन कर, इधर उधर भटकते फिरते हैं,
ना जाने जिंदगी के किस मोड़ पर वह आत्मा और परम आत्मा की परम शांति मिल जाए, जिस की तलाश में हम सभ भटकते फिरते हैं।
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