जिंदगी किया है ?
जिंदगी एक हड्डियों के पिंजर पर मास, चमड़ी और बालों की फर के कपडे /परदे चढ़े हैं,जिस के अंदर बोरे में ,अन्न ,दराव /पानी औरअट्मॉस्फेर के गैसेस भरे हैं,कुछ सव चालक यंत्र जैसे,फेफड़े,दिल,किडनी और गैसेस की सर्कुलेशन के साथ ब्लड सर्क्युलेटिंन सिस्टम और कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस के लिए ब्रेन और नर्वस सिस्टम के कंप्यूटर यंतर लगे हैं । बाहर से सूर्य की रौशनी से इस अँधेरे मंज़र की सुबह होती है,दुपहर होती है फिर शाम और मस्त सोने के लिए रात होती है। ऐसे ही जीवन/जिंदगी का यह चक्कर चलता रहता है,जब एक दिन यह हडियों के ढाँचे से सभ उड़नशील पदार्थ उड़ कर आसमान में आ जाते हैं और यह हड्डियों का पिंजर जमीन पर ही,अलग अलग सामाजिक सोच के मुताबिक आगे की किरिया के लिए, बेजान पड़ा रहता है
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