भारत एक अँधा देश।
इस अति सूंदर धरती पर एक ऐसा भी देश है, जिस में जिन्दा इंसानों की बजाए बेजान पथरों के मंदिरों,मस्जिदों ,गुर्दवारों और चर्चों को इन की बे जान पथरों कि मूर्तियों और बेजान किताबों को जियादा महत्तता और एहमियत दी जाती है और इन पर सभ से जियादा दौलत और वकत लगाईं जाती है,इंसान तो चाहे भूख और बे रोजगारी से मरते रहें,बीमारियों से मरते रहें इस देश की सरमाएदार,मूरख और बेईमान सरकारों और इन के चमचे बेईमान धार्मिक संस्थाओं को कोई फरक नहीं पड़ता। इस देश में इंसानियत का जो कि वास्तव में भगवान् है, इस का तो त्रिस्कार किया जाता है और ब्राह्मणो/गियानियों के गंदे और सड़े हुए मन की उपज, ३३ करोड़ बे जान पथरों से बने देवताओं को अन्य तरह के भोजन परोसे जाते हैं और इन की धार्मिक किताबों का जिन्दा इंसान की तरह सिंगार और पाठ पूजा किया जाता है । ऐसा अंध विश्वाशी और नॉन साइंटिफिक नरक जैसा अनपढ़ और वैज्ञानिकता से अँधा देश दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। अपने वास्तविक निष्काम इंसानियत की सेवा और प्रेम में प्रैक्टिकल लाइफ बहुत कम देखने को मिलती है और सिर्फ यही सच्चा धरम है।
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