Sunday, February 20, 2022

LEHREN AUR ATMA [ATMOSPHERE].

 लहरें और आत्मा। 

समुन्दर की लहरें भी किनारे तक  आते आते थक जाती हैं,

किनारों से टकराकर टूट जाती हैं,और जो धन सीपियों शंखों का लेके आई थी सभ किनारे पर ही छोड़ जाती हैं। 

कुछ लहरें टाइडज बन कर आती हैं,या सुनामी बन कर आती हैं ,

लेकिन  सभी किनारों पर आ कर दफ़न हो जाती हैं। 

यह हमें हमारे जीवन की भी, इसी तरह याद दिलाती हैं ,

हम दोनों की इन लहरों  का राज छुपा है इन के ऊपर बैठी हवा [आतम] के दबाव का। 

जो दिखाई तो नहीं देता  है पर राज और हुकम तो हम सभी पर इसी आतम का चलता है। 

हमारे खून पर भी ये दबाओ डाल कर हमारा संतुलन बिगाड़ देती हैं, 

यह दबाव नीचे की तरफ हो कि या ऊपर सर की तरफ हो हमें यह  परेशान करता रहता है। 

डॉक्टर इस दबाव को ब्लड प्रेशर का नाम दे कर दवाइयां देते रहते है ,

पर इस आत्मा [अट्मॉस्फेर ] को जाने और समझे  बिना इस के दबाव को काबू में करना न मुमकिन सा ही लगता है। 

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