Monday, February 21, 2022

HAMARA MAN KIYA HAE ?

हमारा मन किया है ?

हमारा मन एक पानी के छपड से उड़े हुए बादल/भाव  के पतंग की तरह है ,जिसकी डोर हमारे मन के छपड के हाथ में है। यह पतंग हवाओं में अपने मन की इच्छाएं पूरी करने के लिए, अपनी उड़ानें भर्ती रहती है। इच्छा पूरी होती हो या ना हो ,थक हार कर और टूट काट कर जब नीचे गिरने लगती है तो अपनी शान्ति का एहसास होता है। जब  यह पतंग अपने छपड में गिर जाती है तो पूर्ण शान्ति और संतुष्टि  का एहसास होता है। मन की दौड़ की थकान और आराम की पूर्ण शांति और संतुष्टि  में यही फरक होता है और इंग्लिश में इसी प्रकिरिया को सइंटिफिकली मैडिटेशन और सेडीमेन्टेशन  कहते हैं।  

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