Sunday, February 27, 2022

INSANIYAT.

 इंसानियत। 

इंसानियत बहुत खुद गरज और बे रेहम हो गई है, कोई एक दुसरे से साहन भूति ख़तम होती नज़र आ रही है। किया बनेगा ऐसी दुनिया का जो अपने ही जीवन और शान्ति को नष्ट करने पर लगी हुई है ? इस दुनिया की इंसानियत ईस्ट और वेस्ट में बंटती दिखाई दे रही है और हालात तीसरे महान युद्ध की तरफ जाते नज़र आ रहे हैं। लगता है ,ये दौलत और पावर के भूखे लोग इस सूंदर दुनिया को अपने खुद गरज सपनों के लिए नष्ट करके ही दम लेंगे ।  


No comments:

Post a Comment