ओ दुनिया वालो।
ओ दुनिया वालो,अपने मन को पहचानो और समझो ,
यह मन बहुत विचलित करने वाला और उलझाने वाला दराव और अँधेरा करने वाला है।
यही हमारे सभी अंधेरेपन और हमारी मूर्खताओं और अगियानता का भी कारण है ,
यही मन ही हमें सूर्य की रौशनी और हमारी चेतना की रूकावट का कारण है।
यह मन हमारे सभी छन भर के सुखों की लालसा का भी कारन है ,
इसी मन के भटकावे में आ कर हम परम आत्मा के सदीवी सुख से वंचित हैं।
इसी मन ने हमें अनेक जातियों और धर्मों की अगियानता के अँधेरे में बांटा है ,
इसी मन के अनेक रंगों ने हमारी बुद्धि को भरमाया है, लड़ाया है और मरवाया है।
हम इंसान तो परम आत्मा की बक्शीश से शरीर, मन,बुद्धि, आत्मा और चेतना के धन से परिपूर्ण थे ,
पर इनको कब और कैसे इस्तमाल करना है इसी विज्ञान से वंचित हैं ,जिस को सिर्फ स्पिरिचुअल साइंस कहते हैं।
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