शुद्ध पर्यावरण।
शुद्ध पर्यावरण को ही परमात्मा कहा गया है जिस में से हम अपना स्वास/प्राण लेते हैं। इन झूठे और लूटने वाले धर्मों ने हमें हमेशा ही उल्लू बनाया है,यह हमारी हमेशा से कमजोरी रही है की हम जीवन को अपनी मूर्खता/अनपढ़ता के कारन सीधा नहीं देख सके। वैज्ञानिक दृष्टि बनाओ और अपने अँधेरे/इग्नोरेंस को मिटाओ।
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