Sunday, October 24, 2021

BHARAT KA CHINTAN.

 भारत का  चिंतन । 

भारत का चिंतन,हज़ारों सालों से रूहड़ीवादी/ मनुवादी/ब्राह्मणवादी  विचारधारा से धरम और जातियों के पीछे खिच्चू बंधनों में फंसा और जकड़ा  रहा है ,जिस की वजह से कोई लिबरेटेड और प्रगतिशील वैज्ञानिक  विचारधारा पैदा नहीं हो सकी है। इसी कारन से आज का  वैज्ञानिक युग होते हुए भी देश उन्हीं पुराणी परम्पराओं से ग्रेहसत है और इस दुनिया में सभ से पीछे गरीबी ,भूखमरी, उंच नीच,बेरोजगारी ,अनपढ़ता ,दंगे फसादों ,इकनोमिक फेलियर बेईमानी,करप्शन और डिवाइड एंड रूल जैसे हथकंडों से झूझ रहा है। 

 

 




 

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