धार्मिक या साइंटिफिक सोच।
धार्मिक सोच उन पुराने सोचने वाले लोगों ने दी हुई है जब कि अभी साइंस की सोच की शुरुआत नहीं हुई थी। सारे जीवन और कुदरत के अनुभव मनुष्य शरीर दवारा ही किये जाते थे, किसी इलेक्टॉनिक माइक्रोस्कोप और टेलिस्कोप जैसे सूख्श्म तंतुओं को लाखों गुना बड़े करके दिखाने वाले ,देखने के यंत्र नहीं थे। आज दुनिया बहुत सइंटिफिकाली डेवेलोप हो गई है और जागरूप हो गई है ,अब किसी पढ़े लिखे को अंध विश्वाशों में उलझाया नहीं जा सकता है इस लिए अब पुराणी बातों और विचारों की इतनी एहमियत नहीं रह गई है। इंटरनेट पर अब हर तरह की इनफार्मेशन हमारे गियान और विज्ञानं को जानने और बढ़ाने के लिए उपलब्धत है।
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