धरम का चश्मा।
जो धरम का चश्मा पहन कर इंसान की पहचान करें,
ऐसे मनुष्य को जानवर ही समझिये,इंसान तो नहीं है वह।
कुदरत के घर से हम सभ इंसान ही आते हैं लेकिन ,
हमारी नफरत ने हिन्दू,मुस्लिम,सिख और ईसाई बनाया।
अपनी देखने वाली आँख की नज़र को बदलिए ,
यह बांटने वाली नज़र का कसूर है, जो अभी तक समझ नहीं आया।
यह धर्मों के झगडे ,यह जाती की नफरतों ने देश को तभा कर के रख दिया,
जो सरकार ऐसे झगडे करवाए ऐसी सरकार का देश में राज करने का हक़ नहीं।
बदल दो ऐसी सरकारों को इनकी बुद्धि भरषट हो गई है,
इनको को जम्हूरियत,और संविधान की रेस्पेक्ट का कोई खियाल नहीं।
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