बदलाव।
जब तक पीड़ित लोगों में जाग्रति नहीं आएगी ,लोग धरम और जातियों के अंध विश्वाश ,वहम और चक्क्रों से मुकत नहीं होंगे,और अपने जीवन को सूधारने के लिए,भगवान् और ईश्वर के बजाए , खुद को जिमेवार नहीं समझते और वैज्ञानिक दृष्टि नहीं बनाते ,तब तक कोई बदलाव संभव नहीं है,लोग ऐसे ही आरएसएस जैसे पॉलिटीशंज,गुंडे और धार्मिक लोगों के षड यंत्रों का शिकार होते रहेंगे।
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