खुमारी/नशा ,हमारे अंदर की शराब।
जैसे बाहर की शराब को बनाने की प्रकिरिया है,वैसे ही हमारे अंदर भोजन,पानी,मीठे आदि की फेरमेंटशन से कुदरती शराब [अल्कोहल ] बनती है,जिस को मन भी कहा जाता है,जैसा अन्न वैसा मन । इस मन को ब्रेन/दिमाग में ले जा कर, इस के नशे से मज़ा लिया जाता है, जिस को धरम का नाम दिया गया है।इस विधि को सीखाने वाले इसको मैडिटेशन,कीर्तन,भजन,प्रार्थना और म्यूजिक का नाम दे कर बहुत बड़े धंदे कर रहे हैं। असली धरम इसी शराब को दिमाग की तरफ ले जाने की बजाए इसको नीचे की तरफ से निकाल देना [नशा मुकत] होना ही, धरम और मन की शान्ति होता है। साइंस इसी नशे को टोक्सिन/फ्री रेडिकलज कहती है, जो हमारी सभी बिमारियों का कारन है। इसको समझने के लिए ,शिव [मनुष्य] के गले में सांप दिखा कर, पाइजन /टोक्सिन को ही दिखाया गया है। धरम साइंस के आने से पहले, विज्ञान से अनपढ़ लोगों को चित्रों/मूर्तियों से समझने का ही विज्ञान था जिसको धरम कहा जाता था।
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