Sunday, January 9, 2022

VICHAAR KARANTI.

 विचार क्रांति।

छोडो मूर्खता की बातें,करो विचार क्रान्ति,

नहीं चलेगी अब मूरख लोगों की फैलाई हुई भरांति।

बहुत सेह ली है इन की गुलामी,कोई नहीं है हमारा हामी,

अपनी चेतना का बिगुल बजाओ और अपने जीवन को सूंदर और ख़ुशी बनाओ।

अगर यह हमें गुलाम बनाने वाले संगठित हो सकते हैं हम कियूं नहीं,

उठो जागो सावेर हो चुकी है ,अब सो कर अपनी जिंदगी नहीं गंवानी।

हम जुलम सहने वाले बहु सांखियक हैं, यह जुलम करने वाले लोग तो मुठी भर हैं ,

फिर कियूं नहीं हम अपनी सरकार बना सकते,और अपने जीवन को सुधारने के कानून बना सकते ?

ढूंढ निकालो इन सभी जालिम दरिंदों को,जो इंसानियत को नष्ट करने पर तुले हैं,

कर दो इन जालिमों को पूर्ण निष्क्रिय,तां कि यह जालिम दुबारा अपना सर ना उठा सकें।

सभी जुलम सहने वालों का सगठित होना बहु जरूरी है ,

अपने जीवन को सूधारने का सिर्फ यही मंतर प्रभावी है।

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