Wednesday, January 19, 2022

VAHEGURU KI SAWARI LIYE YEH KISHTIYAAN.

वाहेगुरु की सवारी लिए यह किश्तियाँ। 

हम सभ समुन्दर में चल रही,हवा और धुप  की सवारी लिए,  किश्तियाँ हैं,

समुन्दर की  लहरों के डर के थपेड़े सेहती हुई और मौज मस्ती करती हुई। 

कहीं यह जोश मारता हुआ खूंखार पानी,

किश्ती के अंदर आने को आतुर पानी । 

किसी तरह मेरे आत्म, मेरे फेफड़ों की हवा में ना आ कर,मेरी मौत बन जाए ,

यह हवा ही तो मेरी जाने जिंदगी ,मेरी आत्मा और मेरी रूह,मेरा परम आत्मा  है ,

यह निकल गई तो फिर में किसके सहारे स्वास लूँगा, बोलूंगा,हसूंगा और किसको वाहेगुरु कहूंगा ?   
















 

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