अपनी फोटोएं खिचवाने के शौक़ीन।
ओ अपनी फोटोएं खिवने के शौक़ीन,तू इतना सूंदर भी नहीं है ,
सूंदर तो वह होता है जिस का इस मंदिर में रहता मन भी सूंदर होता है।
हर वकत कैमरा लिए तू घूमता रहता है किया जिस काम के लिए तुझे चुना गया है,उस को भी कभी करता है ?
एक दिन आएगा जब अपना मुँह आड़े, बिन स्वासों के, इसी धरती पर पड़ा होगा,फिर कैसी अपनी फोटोएं खिचवाएगा ?
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