मार्क्स और धरम।
मार्क्स की यह बात कि धरम एक अफीम का नशा है,मैने इस को अपने स्पिरिचुअल प्रयोगों में,१००% सच सिद्ध पाया है। सभी धर्मों में कुण्डलनी जागरण करवा कर मन [टोक्सिनज] को दिमाग में ले जाया जाता है जिस से शराब और ड्रग जैसा नशा चढ़ा रहता है और साधक का मन सेमि कॉन्ससियस यानि नशे और आनंद में चूर रहता है,इसी नशे को गुरु नानक दवारा खुमारी भी कहा गया है। इस नशे से अगली स्टेट बे होशी की होती है जो कि बहुत खतरनाक भी है और इस में मृत्यु तक भी घट सकती है। यह कुण्डलिनी जागरण कि परिकिरिया हमारी होश और चेतना से बिलकुल ही उलट है। इस प्रकिरिया को साधक से करवा कर उस को हिप्नोटाइज करके, गुरु दवारा, अपना गुलाम जैसा फोल्लोवर बनाने का षड यंत्र है।
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