Wednesday, January 19, 2022

HOSH MAEN AAO ANDH BHAKTO.

 होश में आओ अंध भक्तो।   

ओ भोले भाले,लेकिन पढ़े लिखे,पर वैज्ञानिक नहीं और इस माटी से बने शरीर में रहने वाली सवास [हवा] से  बनी आत्माओं ,तुम्हारा जीवन, पुराने ज़माने से,सदियों से, तुम्हें इन गोलक/रोजी /पैसे  कमाने वाले,  ब्राह्मणों,गियानियों और  पुजारियों दवारा, समझाया गया, तुम्हारे ही दवारा, ईटों पथरों से बनाए गए  ,पाठ और पूजा के  मंदिरों,मस्जिदों,गुदवारों और चर्चों लेकिन सूंदर निरजीव बिल्डिंग्ज से नहीं बना है,यह धरती माता के ऑर्गनिक  तत्वों से,हाड़ी, मॉस,पानी और खून से बना हुआ,  हवा,आत्मा और परम आत्मा  [एटमॉस्फेर] ,जिस में वास कर रहा है ,ऐसा खता,पीता,चलता,फिरता,हस्ता, बोलता खेलता यंत्र है,जिस में से जब यह हवा [वाहेगुरु] निकल जाएगी तो यह हवा रहित  भुकाने की तरह शरीर, धरती/मिटी  पर ही गिर जाएगा और माटी में ही मिल जाएगा।     

   









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