में और तुम।
में पृथ्वी हूँ और तुम मेरा असिस्तव हो,पानी हो,हवा लिए आत्मा होऔर ब्रह्म की रौशनी और अँधेरा हो,
में तुम्हें दावत देता हूँ और तुम भागे भागे मेरे सूखते जीवन की रक्षा करने आ जाते हो और मुझे सुरजीत कर जाते हो।
यह हवाएं और यह रौशनी और गर्मी , फिर इस रस भरे जीवन को चाट जाती है ,
तुम आत्मा/परम आत्मा रसों से भरे फिर अपनी ठंडक ,नरमी, मॉइस्चर,और रौशनी लिए आ जाते हो और अनंत खुशियांऔर आनंद भी दे जाते हो।
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