बहुत पुराने झूठ और अंध विश्वाश के पुलंदे।
कुछ पुराने ज़माने के संस्कृत पढ़े लिखे पुरषों ने,जिन को मनुवादी, हिन्दू, ब्राह्मणों, के नाम से जाना जाता है , अपने जीवन की रोजी और रोटी की, पाठ पूजाएं करके, बेईमानी की कमाई करने के लिए,और उस ज़माने के,अनपढ़ लोगों को अपना गुलाम बनाने के लिए , इतने झूठ और अंध विश्वाश फैलाए हुए हैं कि जिनको मिटाने के लिए,बड़े बड़े, कबीर,नानक,रेहदास जैसे अधियात्मिक समाज सुधारक भी आए और अब नए युग की जाग्रति फैलाने वाली तालीम, साइंस की सचाई, को भी बहुत करड़ी महनत करनी पड़ रही है। इसी लिए भारत और अफ्रीका जैसे देश अभी तक, पूरी तरह ,इन झूठ और अंध विश्वाशों के जंगल से बाहर नहीं निकल पाए हैं और अभी तक बहुत भयंकर गरीबी और अनपढ़ता की मार झेल रहे हैं।
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