जाग्रति और होश का आवाहन।
तुम सभी पछड़े हुए और गरीब लोग, हमेशा तम्बाकू पीते रहो,शराब पीते रहो,गांजा पीते रहो या फिर धतूरा पीते रहो,या फिर पाठ पूजा के मंदिरों में पथरों की मूर्तियों के साहमने अपने माथे रगड़ते रहो और तालियां और टल्लीयान बजा का भजन गाते रहो और अपनी जेबें इन पुजारियों के लिए खाली करते रहो, कियुँकि तुम बेहोशी में रह कर यह जीवन गुजारना और नष्ट करना चाहते हो,जो तुम्हें जगाने आएगा तुम उस को भी मार डालोगे ,कियूंकि जाग्रति एक जीवन को जीने का सही इंक़लाब है जुलम और नशों से लड़ने का और सही साइंस की पढाई करने का, इन नशों की लत को, तुम्हें इन मनुवादी और हिन्दुत्वादी गन्दी ताकतों ने, अपना गुलाम बनाने के लिए लगाई हुई है। तुम आज से नहीं सदियों से और हजारों सालों से इन ब्राह्मणी ,मनुवादी और हिन्दुत्वादी ताकतों का जो भारत देश में बाहर से आए अंग्रेजों के,और षड यांतरकारी और जुल्मी देश के अमीरों के एजेंट बन कर देश से धोखा करते रहे हैं ,उनके गुलाम बन कर रहे हो। तुम गरीब लोग जाहलत के जीवन से जाग्रत और आज़ाद होना ही नहीं चाहते हो। नशों ने तुम्हारे दिमागों को नष्ट कर दिया है। बाबा साहिब आंबेडकर भी शायद तुम्हारी इस नशों की नींद के साहमने आज हार जाते। तुम पढ़ लिख कर ,नशों से मुकत हो कर और एक संगठन में एक साथ आ कर, अपने रूले हुए,और पछड़े हुए जीवन को, जद्दोजेहद करके और इंक़लाब करके सुधारना ही नहीं चाहते हो।
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