असिस्रव की बांसुरी।
ओ असिस्तव की बांसुरी बजाने वाले,तुम्हें पता नहीं इन संसारी लोगों ने,अपने संकलप से तेरे अनंत चित्र बना कर,तुझे किया किया समझ रखा है ? लेकिन वास्तव में तो तू निराकार है,तेरा कोई कैसे चित्र बना सकता है ? खेर मुझे इसकी किया पड़ी है कोई कुछ भी सोचे,अपना अपना मन है।
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