आत्मा और परम आत्मा किया है ?
किसी भी आग को जलाने के लिए फ्यूल,हवा यानि ऑक्सीजन और चिंगारी की अविषाक्त होती है। आत्मा हमारे स्वास की हवा है जो हमारे भोजन को जलाता [ऑक्सीडाइज़ करता है ] है ,मुख तौर पर ऑक्सीजन है,जिसको जब तुम जियादा बीमार होते हो,या मरने के करीब होते हो, और आई सी यु में भर्ती होते हो, तो डॉक्टर के दवारा तुम्हारा जीवन बचाने के लिए तुम्हारे नाक से दिया जाता है। कुदरत में इस ऑक्सीजन के या हवा के बे तहाषा भण्डार को अट्मॉस्फेर [परम आत्मा] कहते हैं जिस में हम सभी जीव जिन्दा रह रहे हैं और जिस तत्व के बगैर हम जिन्दा बिलकुल भी नहीं रह सकते जैसे कि मछली बगैर पानी में रहे जिन्दा नहीं रह सकती है। इसी लिए सात गुरु नानक जी ने पवन यानि हवा यानि ऑक्सीजन और नाइट्रोजन को गुरु यानि गियान और विज्ञान तत्व कहा है जो आज इस ज़माने में हमें रेडियो/टेलीविजिन तरंगों के द्वारा सभी इनफार्मेशन यानि परसागरण कर रहा है। नानक एक वैज्ञानिक दृष्टि वाले ही उत्तम इंसान और एक आद्यात्मिक वैज्ञानिक थे।
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