Sunday, October 9, 2022

VA,VAYU,VAT,AIR,AUR PRAN TATAV.

वा ,वायु ,वात, एयर और प्राण तत्व । 

सत गुरु नानक जी  की सारी स्पिरिचुअल साइंस यानी जीवन की खोज, वा ही गुरु तत्व, की है। इस वायु तत्व,जिस को हम इंग्लिश में एयर [अट्मॉस्फेर की २१% ऑक्सीजन और ७८% नाइट्रोजन गैस] बोलते हैं,जिस के बगैर कोई भी अग्नि नहीं जल सकती जैसे हमारे अंदर भी हमारे शरीर को जीवट रहने के लिए ३७ डिग्री सेंटीग्रेड गर्म रखने के लिए, हीट पैदा करने के लिए, भोजन को ऑक्सीडाइज करने  के लिए, ऑक्सीजन की आवशयकता जरूरी है जिसको हम अपना प्राण भी बोलते हैं। इस प्राण तत्व के,किसी भी कारन से, हमारे शरीर में कम पड़ते ही या निकलते ही हमारा शरीर ठंडा पडने लग  जाता है,सारी किरियाएँ बंद होने लगती हैं, और हमारी मृत्यु हो जाती है।शरीर की गर्मी ही हमारे शरीर में बिजली,हमारी दिल की धड़कन और नबज  का काम करती है आज साइंस भी इसी नतीजे पर पहुंची है कि जिस तत्व वायु यानि हवा से हम बोलते हैं वोही हमारा प्राण तत्व है। तभी किसी के बीमार होने पर डॉक्टर सभसे पहले मरीज को ऑक्सीजन लगाते हैं कि इसको हवा [ऑक्सीजन] भरपूर मात्रा  में मिलती रहे । सत गुरु नानक जी ने इस हवा को, सवास को,प्राण को,ऑक्सीजन को,  गुरु तत्व करके नवाजा है,और बोले  हैं, कि वा [एयर/ऑक्सीजन] ही गुरु है ।  

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