असली धार्मिक वियक्ति कौन है ?
धार्मिक स्थान में जाना ,पाठ पूजा करना,कीर्तन सुन्ना धार्मिक होना नहीं है जब तक तुम्हारा अपने मन पर नियंत्रण नहीं होता और दूसरों के प्रति तुम्हारा विवहार प्रेमपूर्वक नहीं होता।
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