इंसान के दुखों का कारन किया है ?
अगर लोग,सरकारों दवारा मदद मिल रहे, सरमाएदारों और कैपिटलिस्टों की बे शुमार प्रोफिटेबिलिटी,उंच ,नीच, महंगाई, बेईमानी, बेरोजगारी, करप्शन और कम्युनलिस्म के कारण दुखी हैं तो सरकारें इलेक्शन में इतनी आसानी से कैसे जीत रही हैं ? किया इन पर लोग एक साथ आ कर,विद्रोह/इंक़लाब कर के, रोक लगा कर या ऐसे कारणों को मिटा कर, इन कुरीतियों को मिटाया नहीं जा सकता है और अपने जीवन को सुखी नहीं बनाया जा सकता है ?
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