मन की ख़ुशी,आनंद और शान्ति।
अपने मन की ख़ुशी,आनंद और शान्ति तुम्हारे ही शरीर के सेलों और इन में रह रहे,मैसूस करने वाले, मन की विवस्था है नाही किसी किताब,ईटों पथरों के धार्मिक स्थान,और नाही नकली गुरुओं,पीरों,तांत्रिकों के पाऊं पड़ने से मिलनी हैं। यह तो कुदरत और असिस्तव की वह सौगात है जो सिर्फ इंसानी शरीर के जिन्दा, मैसूस करने वाले मंदर, पर ही बरसती है।
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