अकार और निर- अकार।
अकार तो हमारे शरीर तक ही सीमित है। जब मरितु के बाद मर कर यह शरीर पृथ्वी पर गिर कर पड़ा रह गया ,पीछे तो फिर निर-अकार ही रह गया ना, जिस को किसी ख़ास अकार में नहीं समझा जाता। निर आकार में नाटो कोई भूत प्रेत हैं,ना देवी देवते हैं, ना ही कोई एंजेल्स हैं। जिन को भी कुछ नजर आता है यह उनके मन का वहां है या उनकी कल्पना है। सिर्फ पानी भाप बन कर उसके बादल ही नजर आते हैं, हवा तो नजर आती नहीं है।
No comments:
Post a Comment