मनुखी जिंदगी।
मनुखी जिंदगी में जितनी तरह तरह के जीवन हैं,उस में कितने कष्ट हैं,कितने दुःख हैं या कितने सुख हैं, वह सभ हमारी सोच यानि मन की अवस्था साइकोलॉजी से जुड़े हुए होते हैं,जो हमारे खान पान और सास लेने के ढंग पर निर्भर करते हैं जिसको हमारी चेतना यानि एजुकेशन या नॉलेज या हमारी साइंटिफिक रिसर्च या हमारे अँधेरे मन में रौशनी अपना रोल अदा करती रहती है। जीवन बहुत ही जटिल मार्ग है,जिस को सरल शब्दों में ,एफ्फोर्ट्लेस्स और रिलैक्स हो कर ही,जिसको हम मैडिटेशन का नाम देते हैं,सरल बनाया जा सकता है।
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