जीवन।
जीवन को खुसी से,आनंद से और प्रेम से जीने के लिए,ना तो किसी धरम के ,ना जात पात के,ना ही किसी पॉलिटिक्स के लफड़े में पड़ने की जरूरत है। जरूरत है तो सिर्फ इस शरीर को ही हर तरह से तंदरुस्त और बचाए रखने के लिए जिन अविषाक्ताओं की जरूरत है उन को ही जुटाने की जरूरत है,बाकी सभ बेकार है, आडम्बर है।
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