माटी, पानी और वायु ही गुरु पर सूर्य।
बिन पानी और वायु के जीना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन है इस माटी के जीवन को,
तभी तो नानक जैसे गियानी [साइंटिस्ट] ने कहा है धरती माता [मैटर,माटी ],पानी पिता और पवन [वायु] ही गुरु है।
हम माटी पानी और हवा के बने पुतले [औजार] ही तो हैं,मगर ,
रौशनी, गर्मी और बिजली[शक्ति] का सिरताज तो सूर्य ही है ,जो सभ को दृष्टि देता है,अकल देता है ,और सभ गुणों का सागर है।
[मिटी धुंद जग चानण होया नानक [सूर्य सामान ] परगटिया]
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