गॉड,भगवान्,ईश्वर,अल्लाह,वाहिगुरु आदि।
गॉड,भगवान्,ईश्वर,अल्लाह,वाहिगुरु आदि कोई इंसान या उस की आत्मा नहीं है। यह सारी श्रिष्टि पदार्थ और इसकी शक्ति का खेल है। इस को दुनिया के सभ से बड़े साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी एक्वेशन इ = एम् सी २ द्वारा स्पष्ट किया है। हमरे शरीर का भी जो मास्स है उस की एनर्जी या शक्ति इस के सेण्टर से ले कर बाहर की तरफ एक इनविजिबल औरे या फील्ड की शकल में होती है,जिस को आत्मा भी कहते हैं। हम जीवन को जिन्दा रखने के लिए खाना ,पानी,दूध,जूस और हवा आदि देते हैं,बिजली की ऊर्जा हमें सूर्य की शक्ति और अट्मॉस्फेर के एलेक्ट्रोमग्नेटिस्म से मिल जाती है। सृष्टि के हर बड़े से बड़े पिंड और छोटे से छोटे कण के मध्य में गुरु तत्व यानि ग्रेविटेशन और एलेक्ट्रोमग्नेटिस्म होता है जो इनके मास्स को बाँध कर रखता है,ऐसे ही हमारे शरीर का भी गटविटेशन सेण्टर और एलेक्ट्रोमग्नेटिस्म होता है। यह ग्रेविटेशन और एलेक्ट्रोमग्नेटिस्म की फोर्सेज ने ही सारी सृष्टि को एकदूसरे से माला की तरह जोड़ रखा है। इस सृष्टि में हर पिंड की अपनी रेडिएशन शक्ति होती है कोई सूर्य की तरह,कोई धड़कते दिल की तरह ,कोई वाइब्रेशन की तरह और कोई सक्शन /ब्लैक होल की तरह। इस श्रिष्टि या यूनिवर्स में हर कार्य को सम्पन करने के लिए सर्किट या सिस्टम बने होते हैं जैसे पृथ्वी पर जीवन पैदा करने के लिए धरती,पानी,अट्मॉस्फेर, आकाश और सूर्य का सर्किट या सिस्टम है जिको हम वैज्ञानिक तौर पर ईश्वर के नाम से जानते हैं। ईश्वर कोई इंसान नहीं है बल्कि एक श्रिष्टि या कुदरत का वैज्ञानिक सिस्टम है।
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