सच किया है ?
सच को अपने दर्शन देने के लिए, ना तो किसी मंदिर,मस्जिद,गुर्दवारे या चर्च की जरूरत है और ना ही किसी प्रचार की जरूरत है ,कियुँकि यह सभ तो झूठे धर्मों के ईटों और पथरों से गरीबों का बहुत ही खून चूस करके बनाए हुए बिज़नेस सेंटर्स हैं ,किसी भी जीवंत अनुभव के लिए झूठे हैं और मरे हुए पदार्थ के नाकामयाब मंजिर हैं। सच तो सभी जीवन से भरपूर,जिन्दा शरीरों में ही अनुभव किया जा सकता है और कहीं नहीं।
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