Sunday, May 29, 2022

DHARAM KIYA HAE ?

  धरम किया है ?

धरम हमारा मन है,विवहार है, सुभाव है हमारा दुसरे जीवों और इंसानों के प्रति प्रेम भरी   रिलेशनशिप  है। भारत में आरएसएस और बीजेपी के दवारा,   हिंदुत्व को , जाहलों/मूर्खों/अंधों/ अंध भगतों /पशुओं  दवारा दुसरे धर्मों के प्रति खूंखार हौआ  कियूं बनाया जा रहा है ? किया हिंदुत्व  हमेशा बीते हुए समें  की खुनी महाभारत और  रामायण के खुनी खेल की याद दिलाता रहेगा ? हम प्रेम से सभ से मिलजुल कर अलग अलग रंगों के और नस्लों के फूलों के एक सूंदर गुलदस्ते की तरह कियूं नहीं रह सकते ? इसी विचारधारा का नाम ही तो वासुदेव कुटंबन/सेकुलरिज्म  है  ?हम में किस वजह से इतना गरूर आ गया है कि हम इतनी अलगाओवादी विचारों से कैसे पशुआता की तरफ जा रहे हैं कि हम सभी से अलग रहना चाहते हैं ? इस का नाम ह्यूमन  सिविलाइज़ेशन नहीं है,लेकिन  हज़ारों साल की पुरानी पशुआता है हम वकत के मुताबिक़ अपनी बुद्धि से इवॉल्व नहीं हुए है। हमारी सभ इंसानों की जीवन जीने के लिए,एक अपनी आर्थिक दशा को सुधरने के लिए अमन/चैन की विवस्था के साथ कोई कारोबार,  शुद्ध रोटी/खाना, शुद्ध पानी,शुद्ध हवा और शुद्ध वातावरण, मौसम के मुताबिक कपडे और रहने के लिए आरामदायक घर और कहीं आने जाने के लिए एक ऑटो वाहक,अपनी अच्छी तालीम,और अच्छी सेहत के लिए मेडिकल सहूलतें और अपने मन को रिक्रिएट करने के लिए वैज्ञानिक अप्प्लिवंसज  की जरूरत है जिस विषय को हम हमेशा से इग्नोर करते और टालते  आए हैं और सिर्फ अपने अलग अलग अपने तुष् और ईविल  विचारों को जीतने की ही लड़ाई और कत्लेआम करते आए हैं जो एक बहुत ही प्रेम और शान्ति  के वातावरण  के विरुद्ध हैवानों/जाहलों /मूर्खों /अंध विश्वाशी /नॉन वैज्ञानिक जीवन  की किरिया है। ऐसे वातावरण का नाम अगर हिंदुत्व है तो शायद हम अपनी  ही मन चाही  मौत को बुला रहे हैं और किसी को नही। 

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